आध्यात्मिकता ही शांति और सुख का एकमात्र मार्ग
Spirituality is the only path to peace and happiness
चण्डीगढ़ 27 अप्रैल - जिस प्रकार संसार के नियमों का पालन करने से व्यक्ति दंड से बचता है, उसी प्रकार परमात्मा के बनाए आध्यात्मिक नियमों का पालन करने से मनुष्य जीवन सार्थक हो जाता है। मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है और जब यह उद्देश्य पूरा हो जाता है, तब जीवन में वास्तविक सुख, शांति और आनंद का अनुभव होता है, ये उद्गार यहां के स्थानीय प्रचारक डा0 विजय प्रभा ने सेक्टर-30 स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित महिला निरंकारी संत समागम में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु बहनों एवं संगत को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए ।
डा0 प्रभा ने आगे कहा कि आज भौतिक सुविधाओं की उपलब्धि के बावजूद मनुष्य के जीवन में अशांति और असंतोष व्याप्त है क्योंकि वह परमात्मा से दूर हो गया है। वास्तविक शांति केवल आध्यात्मिकता से ही प्राप्त हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि जब मनुष्य सभी में एक ही परमात्मा को देखता है, तब आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भावना स्वतः विकसित हो जाती है।

डॉ. विजय प्रभा ने पारिवारिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भव्य मकान तो बन गए हैं, परंतु घरों में अपनापन और प्रेम की कमी देखी जा रही है। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए क्षमा, सहनशीलता और आपसी सम्मान को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बहनों को विशेष संदेश देते हुए कहा कि वे अपनी पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भक्ति मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहें। साथ ही उन्होंने आत्ममंथन करने, दूसरों की कमियों के बजाय स्वयं को सुधारने तथा बुजुर्गों का सम्मान करने पर विशेष बल दिया।

इस अवसर पर विभिन्न आयु वर्ग की बहनों ने गीत, कविताओं, विचारों एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्ति भाव प्रकट करते हुए वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

कार्यक्रम के अंत में यहां के ज़ोनल इन्चार्ज श्री ओ0 पी0 निरंकारी, संयोजक श्री नवनीत पाठक, मुखी सैक्टर 45 ऐरिया श्री एन के गुप्ता द्वारा सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं उपस्थित संगत का आभार व्यक्त किया गया।